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How Do Animals Communicate

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जानिए, जानवर किस भाषा में बात करते हैं ?

 

दोस्तों,

आमतौर पर हम इंसान एक दुसरे से आपस में बात करके एक दुसरे को समझ लेते हैं. अलग-अलग जगहों पर लोगों की भाषाएँ अलग-अलग हो सकती हैं पर सभी एक-दुसरे से बात जरूर करते हैं. पर क्या कभी आपने सोचा है कि जानवर या पक्षी एक – दुसरे की बात कैसे समझते हैं ? क्या वो बातें करते हैं ? अगर वो बातें करते हैं तो कौन सी भाषा है उनकी ? अगर वो एक दुसरे की ही भाषा समझते हैं तो कैसे शेर सर्कस के रिंग मास्टर की भाषा समझता है ? डोल्फिन क्यों अपने ट्रेनर के इशारे पर नाचती हैं ? आज के टॉपिक में हम इसी बारे में बताने वाले हैं.

जब भी हम जानवरों के बात करने के बारे में सोचते हैं, तो आम तौर पर हमें डिज्नी के कैरेक्टर याद आते हैं  कि कैसे मिक्की माउस, डोनाल्ड डक और टॉम एंड जेरी एक दुसरे से बात करते थे या किसी संगीत पर नाचते थे. ये तो हो गयी टेलीविज़न और कार्टून्स की दुनिया की बात पर असलियत में भी जानवर एक दुसरे से बात करते हैं, जो हम सभी की समझ में नहीं आता. पर इसमें भी एक समस्या है वो ये कि हर  जानवर का बात करने का लहजा यानि के स्टाइल अलग-अलग होता है. तो चलिए बिना समय गंवाए शुरुवात करते हैं एक और रोमांचक जानकारी की………

 

How animal communicate?

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फाइनली, शायद हममे से सभी लोग इस बात को ना मानें पर हर इंसान जानवर होता है और वो अपने तरीके से अपने जैसे ही दुसरे जानवर से बातें करता है. हम इंसान भी समय के साथ साथ बातचीत करना सीखते रहते हैं, और ऐसा हम कर पाते हैं क्योंकि हम ऐसा कर सकने के लिए अनुवांशिक रूप से सक्षम हैं. और इसमें हमारी मदद करती हैं हमारी स्वर ग्रंथियां !! पर ये सिर्फ हमारे पास ही नहीं बल्कि जानवरों में भी होती हैं.

स्वर ग्रंथियों का उपयोग करके हम जानवर समय दर समय बातें करना और भाषाएँ सीखते रहते हैं जिसमे वर्षों की कड़ी मेहनत शामिल होती है. भाषा और संचार कौशल हम सीखते हैं अपने माँ-बाप से, अपने आसपास के लोगों से और जहाँ हम रहते हैं वहां के सामाजिक वातावरण से. हालांकि, कई जानवरों में कुछ आनुवंशिक कोड पहले से मौजूद होते हैं जो उन्हें इस काबिल बनाते हैं कि वो पैदा होते ही एक दूसरे के बीच संवाद कर सकें. क्योंकि यह उनके अपने आनुवंशिक कोड का हिस्सा है और ये समय के साथ साथ और मजबूत होता जाता है. इन सबमे जो सबसे विकसित प्रजाति है वो है हम इंसान. मनुष्य के बच्चे बहुत जल्दी संवाद करना और समय के साथ क्षेत्रीय भाषाएं सीख जाते हैं.

 

Do animals have regional languages?

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यद्यपि, यह समझने का कोई वास्तविक तरीका नहीं है कि जानवर क्या कह रहे हैं? या वे कैसे बोलते हैं? वैज्ञानिक अनुसंधान में पाया गया है कि अलग अलग क्षेत्र में जानवर अलग-अलग आवाज या ध्वनियों का इस्तेमाल करके एक दुसरे के साथ बातचीत करते हैं. हालांकि, यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि कोई रुसी कुत्ता, आपके कुत्ते की भाषा को समझने में सक्षम होगा या नहीं ? क्योंकि यह जानवर की नस्ल पर भी निर्भर होता है. अपने शोध के दौरान, वैज्ञानिकों ने पाया है कि पक्षियों, जानवर, व्हेल और डॉल्फ़िन की अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाएं होती हैं. सबसे अविश्वसनीय क्षेत्रीय भाषा में अंतर नीली व्हेल के बीच है. उनकी जांच के दौरान, समुद्री जीवविज्ञानीयों ने पता लगाया है कि दुनिया भर में व्हेल नौ अलग-अलग भाषाओं में बात करती हैं – इस तथ्य के बावजूद वास्तव में सारी नीली व्हेल एक ही नस्ल की हैं.

 

Yes, they really do have their accents!

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इसलिए, दुनिया भर के सभी जानवरों के पास एक –दुसरे से बातचीत करने के लिए अपने खुद के तरीके या भाषाएं हैं. जैसे कि  ब्रिटेन के लोगों की इंग्लिश बोलने का तरीका, अमेरिका या  दुनिया भर के अलग-अलग लोगों के लहजे या तरीके से अलग होते हैं, वैसे ही जानवरों का भी होता है. यही गुण पाया जाता है अमेरिका में पाई जाने वाली किलर व्हेल में. वैज्ञानिकों ने अपनी खोट में पता लगाया है कि ये किलर व्हेल सिर्फ आवाज सुनकर ही इस बात का पता लगा सकती हैं कि दूसरी व्हेल कहाँ से आई है यानि  कि वो किस क्षेत्र से है. इससे, वे ये पता लगा सकती हैं कि आने वाली दूसरी व्हेल अमेरिका के प्रशांत तट, अलास्का और वैंकूवर के आसपास के निवासी हैं – या वो कहीं और से आई हैं?

 

Experiment on monkey

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अभी तक हमने देखा कि अलग-अलग जानवरों के बीच चाहे वो इंसान हो,पक्षी हो,या फिर डॉलफिन या व्हेल कुछ समानता है तो कुछ अलगाव भी हैं. पर कुछ जानवरों की प्रजातियों ने इस सिन्धंत को गलत साबित कर दिया है. इसे ही जांचने के लिए पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में एक प्रयोग किया गया जिसमें, वैज्ञानिकों ने यह देखने के लिए कि जानवर अपने क्षेत्रीय उच्चारण या तरीके को अपनाते हैं या अपने अनुवांशिक कोड को इस्तेमाल करते हैं बातचीत करने के लिए ?

वैज्ञानिकों ने, नवजात जापानी मकाक बंदरों के साथ दो रीसस मकाकों को बदल दिया जापानी मकाक और रीसस मकाक संचार के तरीके के हिसाब से एक-दुसरे से बिलकुल अलग हैं. हालांकि वे चिल्लाने,भौंकने और डराने के लिए एक ही तरह की आवाज़ का उपयोग करते थे, पर वे उन आवाजों का इस्तेमाल अपने अलग-अलग लहजे में करते थे. वैज्ञानिकों ने देखा कि जब रीसास मकाक खेलता है तब वो बहुत कर्कश आवाज निकलता है , जबकि जापानी मकाक गुटर गु जैसी धीमी आवाज निकलता है.

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि बंदरों के बच्चों को अलग करने और उन्हें अलग-अलग परिवारों के साथ बदलने के बाद भी , बंदरों ने बोलने का अपना नया तरीका नहीं अपनाया. इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि कोई भी जानवर दुसरे के साथ संचार या बातचीत करने के लिए केवल क्षेत्रीय लहजे को इस्तेमाल नहीं करता बल्कि वो अपने अनुवांशिक आदतों को भी इस्तेमाल करता है किसी दुसरे जीव के साथ बातचीत करने के लिए.

 

दोस्तों, यहाँ हमने देखा कि जानवर एक-दुसरे की भाषा जरूर समझते हैं पर एक क्षेत्र के जानवर दुसरे क्षेत्र के जानवर की भाषा नहीं समझते और अपने क्षेत्र की भाषा को समझने के लिए वे अपने अनुवांशिक कोड या गुणों का सहारा भी लेते हैं. जानवरों की भाषा को समझने के लिए हमने तो बस कुछ उदहारण यहाँ रखे हैं और आशा करते है ये जरूर आपका ज्ञान बढ़ाएंगे .

तो दोस्तों आज का टॉपिक यहीं ख़त्म करते हैं, और अगर आपको आज का टॉपिक पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और social media पर भी शेयर करें .

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1 thought on “How Do Animals Communicate

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